खुशी का खेल

मित्रों !
अभी ज्यादा दिन नहीं बीते ....मैंने आपको " एक चिट्ठी " लिखी थी .जिसमें मैंने बड़े उत्साह से आपसे कहा था कि 31 दिसम्बर 2019 की रात बारह बजे से हम ....नये साल के " अपने लक्ष्य " पर काम करना शुरू कर देंगे और नव वर्ष काउंटडाउन शुरू हो चुका है !!
पता नहीं आप नें कुछ सोचा या नहीं ! लेकिन मेरा एक पुराना सपना ....मेरे अवचेतन में सिर उठाने लगा
पहले भी कई बार इस प्रकार के प्रयोग मैं कर चुका हूँ कुछ सफल हुए कुछ असफल .

असफलता की जाँच करने पर ...सफलता न मिलने के कई कारण समझ में आए ...और इन्ही कारणों की खोज में ....मैं थोड़ा ठिठक कर पीछे देखने लगा और एक कड़कदार आवाज अन्तर्मन में गूँजी ...." नीचे मत देख " !!!
मैंने पुछा ....." जब चढ़ रहा था तो बोलता था ऊपर देख और अब ......!"
एक ही बात है न ....ऊपर देख या नीचे न देख !!!
जिंदगी का पहाड़ भी कुछ ऐसा ही है .चढ़ रहे हो तब भी ऊपर देखो और उतर रहे हो तब भी ऊपर ही देखो .
जानते हैं ....आपका लक्ष्य स्वयं ही आप की गोद में आ गिरेगा !!!ऐसा तमाम स्वप्नदर्शी सिद्ध कर चुके हैं .
लेकिन मित्रों !! ये ऐसा खेल है जिसमें आप दर्शक नहीं ....खिलाड़ी हैं 
" और खिलाड़ी को तो खेलना ही पड़ेगा !!!!"
तो आइये .....खुशी खुशी खेलते हैं .

हैप्पी अरुण 



Comments

Anil. K. Singh said…
महोदय ,
बहुत अच्छा ! यह खेल जरूर खेला जायेगा। हम आप के साथ हैं।
Anil. K. Singh said…
महोदय ,
बहुत अच्छा ! यह खेल जरूर खेला जायेगा। हम आप के साथ हैं।

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