और बीस साल तक वे मुझे गालियां देते रहे !!!

मित्रों , आज की कहानी की शुरुआत बीस साल पहले हुई थी .मेरे गाँव से लगभग तीन किलोमीटर दूर एक गाँव में एक ' तथाकथित इज्जतदार सज्जन ' रहते थे , मेरी उनसे कभी बात नहीं होती थी . वे अक्सर मुझे सड़क के किनारे कुर्सी पर एक ही मुद्रा में बैठे दिख जाते थे .आते जाते जब कभी मेरी उनसे नजर मिल जाती तो आदतन कहिए या संस्कारवश मैं उन्हें नमस्कार कर लेता था . इससे ज्यादा मेरी न उनसे कभी बात हुई और न ही मुझे ये पता था कि सड़क के किनारे बैठने वाले इन ' सज्जन' का गाँव में घर कहाँ है ? यहाँ तक कि उनका नाम भी मुझे बहुत बाद में पता चला .फिर मेरा उधर आना जाना लगभग समाप्त हो गया .
कुछ समय बाद मुझे पता चला कि वे ' तथाकथित सज्जन ' जहाँ भी जाते वहाँ अगर उनके कान में मेरा नाम भी पड़ जाए तो वे मुझे उल्टी सीधी बातें कहने लगते यही नहीं कभी कभी अपशब्दों का प्रयोग भी कर दिया करते थे .मुझे आश्चर्य होता कि हम एक गांव के नहीं , कोई लेना देना भी नहीं , कभी आमने सामने बात तक नहीं हुई ,कोई सम्बन्ध भी नहीं .फिर ऐसा क्यों ?
खैर ,कई लोगों ने कई बार मुझे उनके इस व्यवहार के बारे में बताया . मैं बातों को अनसुना करता गया . बहुत दिनों तक खबर आती रही कि उन्होंने मेरा नाम जपना बंद नहीं किया .
एक दिन सूचना मिली कि वे ' तथाकथित सज्जन ' मर गए . न उनके जिन्दा रहते मेरी उनमे कोई रूचि थी और न उनके मरने पर ही अंदर से कोई प्रतिक्रिया आई .
अभी कुछ दिन पहले मैं एक टी स्टॉल पर बैठा कुछ मित्रों के साथ गपशप कर रहा था .इसी बीच उन        ' तथाकथित सज्जन ' की बात चल पड़ी . मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने मित्रों के बीच अपनी जिज्ञासा रखी कि आखिर क्यों वे ' तथाकथित सज्जन ' मुझे बीस साल तक गालियां देते रहे ? मेरे उन्ही मित्रों के बीच मेरे एक परिचित भी थे जो उन्ही ' तथाकथित सज्जन ' के ही गाँव के थे और उनके विषय में हम लोगों से ज़्यादा जानते थे . उन्होंने बताया ..............!!!
उनकी बात सुन कर मैं हक्काबक्का उनका और अन्य मित्रों का मुँह देखता रह गया .मुझे यह जानकर अत्यंत हैरानी हुई कि वे ' तथाकथित सज्जन ' बीस साल तक केवल इसलिए मुझे गालियां देते रहे क्योकि एक बार सिर्फ एक बार रास्ता चलते मैंने उनको देख कर भी ' नमस्कार ' नहीं किया .




Comments

KULDEEP YADAV said…
सर
अच्छाइयां 100 दिन की भी नजर नहीं आती और बुराई एक दिन की नजर आ जाती है
KULDEEP YADAV said…
सर
आप की कहानी जीवन की सच्ची घटनाओं पर आधारित है
Anil. K. Singh said…
क्या पता अभी भी मरने के बाद गाली दे रहे हो अच्छा लगा
Happy arun said…
हाँ कुलदीप ये सच है
Happy arun said…
धन्यवाद